| एंकाकी |
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एंकाकी जीवन ये तेरा
तूने ना जाना निशा है क्या
क्या पता तुझे कब हुआ सवेरा
एंकाकी..........................
हे नर, उठ चल अब कुछ तो कर
कुछ कर के बढ़ा अपना स्तर
ये देख वर्षा आयी है तुमुल
और बोल रहे है, ये खग कुल
प्रकृति ने अपना रंग बिखेरा
एंकाकी..........................
यह जीवन है एक स्वप्न समान
उसमें तू कर ले हरि का ध्यान
तू है न अकेला, प्रभु तेरा
बस लेता रह तू उसका नाम
करता है पुष्प शूलों मे वास
पर मुख मे रहता सदा हास
तू भी बन जा उस पुष्प समान
और फैला दे अपना ये ज्ञान
फिर देख तेरा एंकाकी मन हो जायेगा अन्तर्ध्यान
आयेगा फिर एक नया सवेरा
एंकाकी जीवन नहीं तेरा
एंकाकी जीवन नहीं तेरा
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