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| स्वदेश |
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जगह-जगह है पुष्प सुशोभित
निर्झर की बहती धारा है
जहाँ कृषिक ने धरती के कण-कण को सवाँरा है
वह भारत देश हमारा है
सदाचार है रहा जहाँ सदियों से देश का भूषण
माताओं ने किया प्यार से जहाँ शिशु का पोषण
देश प्रेम गाँधी सुभाष का जिस धरती पर न्यारा है
वह भारत देश हमारा है,
जहाँ वृक्ष पर सुन्दर पक्षी करते है कल कूजने
जहाँ प्रातः काल मन्दिर में होता शिव का पूजन
मन्दिर के जिन घन्टों ने अन्तर मन को झनकारा है
वह भारत देश हमारा है
जिस धरती पर बड़े हुए दशरथ रत्न श्रीराम
हरिश्चन्द्र का रहेगा अंकित जिस धरती पर नाम
तुलसी और वाल्मीकि ने काव्य को जहाँ सवारा है
वह भारत देश हमारा है
जहाँ किया था वीरान्गना पन्नाधाय ने त्याग
जिस देश में स्थित हैं काशी और प्रयाग
जहाँ महापुरूषों ने इस पवित्र भूमि को उजियारा है
वह भारत देश हमारा है
जिस धरती पर श्रीकृष्ण ने खूब रास रचाया
अर्जुन को समझा, जिसने उसका मोह छुड़ाया
सीता ने जिस धरती पर नारी चरित्र निखारा है
वह भारत देश हमारा है
उसी देश को भारतवासियों शत-शत शीरा नवाते है
जिसकी पूजा में मिल के हम राष्ट्रगीत को गाते है
उसी देश ने आज हम सभी भारतीयों को पुकारा है
यह भारत देश हमारा है-2
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