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| अस्तित्व |
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क्या जाना है अस्तित्व कभी उस नेता का
जिसने देश सेवा का व्रत लिया था
क्या जाना है अस्तित्व कमी उस पुजारी का
जिसने सर्वत्र त्याग किया था
क्या जाना है अस्तित्व कभी उस पुलिस अधिकारी का
जिसने न्याय करने की शपथ ली थी
क्या जाना है अस्तित्व उस समाज सेवक का
जिसने जन सेवा की कसम ली थी
क्या जाना है अस्तित्व उस साधु का
जो बाहृय आडम्बर करता है
क्या जाना है अस्तित्व उस पूंजीपति का जो मात्र
कहने को दरिद्रों का पेट भरता है
इन सबका क्या अस्तित्व है यह सभी को ज्ञात है
जानते हुए भी हम कुछ नहीं कर सकते यही तो विकट बात है
इसका कारण क्या है?
इसमें एकता नहीं है
बड़ा तो छोटे की ओर देखता तक नहीं है
क्या यह हमारा कर्तव्य नहीं है कि हम भ्रष्टाचार को दूर भगाए
और भारत को एक पवित्र स्थल बनाए
इसके लिए हमें एकता चाहिए जो हमें सबके सहयोग से मिलेगी
तभी यहाँ सुदृढ़ व सरल अस्तित्व की ज्योति जलेगी।
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