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| नश्वरता |
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इस मानव देह से प्रेम न कर
एक दिन इसको जाना है जल
जब देह नष्ट हो जाएगी
तब तुझे अधिक रूलाएगी
पाँच तत्व से बनी ये काया भस्मावशेष हो जाएगी
बस एक वस्तु से प्रेम तू कर
जिस पर होता कोई न असर
न बाण भेद सकते उसको
न अग्नि जला सकती उसको
न वायु, हिला सकती उसको
आत्मा ही वह वस्तु अमर
प्रेम स्नेह उसी से कर
ये मानव देह तो नश्वर है
मानव जीवन क्षण भंगुर है
ये कच्चे घट के है समान
झूठे सम्बन्धों की है खान
तू माया मोह से दूर ही रह
बस मुख से अपने राम ही कह
ये जीवन सफल हो जाएगा
तुझे मोक्ष प्राप्त हो जाएगा |
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