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| आनन्द की ओर |
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हमारा जीवन ईश्वर की सुन्दरतम् कृति
जिसमें होती है सुख-दुख दोनों की आवृति
यदि सुख-दुख न हो, तो जीवन व्यर्थ है
बिना इन दोनों के जीवन का क्या अर्थ है
किन्तु प्रश्न ये है कि इनके प्रति हमारा क्या दृष्टिकोण है
यही हमारे जीवन का सबसे बड़ा मोड़ है
सुख में हम सभी बहुत प्रसन्न होते है
दुःख में पता नहीं कितने आँसू रोते है
किन्तु यदि दुःख न हो तो सुख की अनुभूति कैसे सम्भव है
दुःख के बिना सुख की कल्पना वास्तव मे असम्भव है
इस व्यस्त जीवन में हमारे पास समय की कमी है
किन्तु हमारे अन्तर में भावनाओं की न जाने कितनी शाखायों जमी है
कभी इच्छा होती है कि भाव निकल कर बाहर आये
और हम उन सभी का अत्यधिक आनन्द उठाये
किन्तु कुछ फिर ऐसा हो जाता है
कि हमारे मन का सुख-दुःख अन्दर ही रह जाता है
दुःख बाँटने से भी तो सुख ही मिलता है
मन के वीरान कोने में एक छोटा सा पुष्प खिलता है
और उस पुष्प की सुगन्ध हमारे जीवन को महका देती है
हमारे जीवन की छोटी सी कहानी बस यही कहती है
कि जीवन का हर कार्य आनन्द प्राप्ति के लिए है
दुःख मे भी हँस कर हमने अनेकों क्षण जिये है
कि हमें अन्त में अवश्य आनन्द मिलेगा
कभी न कभी समय हमारे चाख हृदय को सिलेगा
पर इस प्रतीक्षा में हम कही सब भूल न जाये
कि आनन्द हमारे सामने से हो कर न निकल जाये
और हम उसे पहचान भी न पाये
इसलिए हमें जीवन के हर क्षण का आनन्द उठाना होगा
चाहे सुख हो चाहे दुःख सदैव मुस्कुराना होगा |
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