|
 |
| |
| विवशता |
|
बुद्धि, श्रम और भाग्य, आज हम
किस पर भरोसा करे
ये तीनों ही हमारा साथ दे
आओ कुछ ऐसा करे
किन्तु भाग्य का क्या होगा
कभी वो हमारा साथ देगा, और कभी साथ न देगा
किन्तु वर्तमान में तो भाग्य से भी कुछ न होगा
क्योंकि अपने भविष्य का परिणाम तो हमें पता है
हमारे वर्तमान निवेश के लाभ पर कितने करों का बोझ लदा है
कि यदि लाभ हो भी गया तो नाम मात्र का होगा
पता नहीं ऐसे समय भी क्या भाग्य हमारा साथ देगा
हममें बुद्धि है, क्षमता है तो फिर पूरे
अवसर क्यों नहीं प्राप्त है
या फिर ये हमारी त्रुटि है
कि कोई विशेष वर्ग हमें नहीं प्राप्त है
हमें तो ये समझ लेना चाहिए कि ये सब उनकी नीति है
एक ही धार को दो में विभक्त करना कहाँ की रीति है
कि एक धार को बहने दिया जा रहा है
और दूसरी धार को रोका जा रहा है
या फिर धीरे बहाया जा रहा है
और फिर यदि गति दोनों की तेज है
तो फिर क्यों ये भेद है
कब समाप्त होगा ये अन्तरद्वन्द
कब सबका जीवन होगा स्वछन्द
काश वो दिन शीघ्र की आये
जब बुद्धि, श्रम और भाग्य
तीनों हमारा साथ दे जायें । |
|
| |
|
|