|
 |
| |
| गरीबी का सुख |
|
वह खेती करता था
जो कमाता था
घर लाता था
खाने भर का तो हो ही जाता था
घर में सुख था लेकिन वह न जाने किस लत में पड़ गया
उसे अपने मित्र से एक लाटरी का टिकट मिल गया
किस्मत साथ थी
बड़ी प्रसन्नता की बात थी
कि उसकी लाटरी लग गयी
वह अति प्रसन्न हुआ
उसके हाथ पैसा आया
उसको शायद गरीबी ने था बहुत सताया
इसलिए वह गाँव छोड़कर शहर में आया
बड़ा भवन बनवा कर परिवार सहित रहने लगा
और एक बड़ा व्यापारी बन गया
पैसा कमाते कमाते उसकी तिजोरी भर गयी
कहाँ गरीबी थी अब अमीरी हो गयी
वो पत्नी और बच्चे जो पहले सात्विक थे अब आधुनिक विचार के हो गये थे
सब अपने में ही व्यस्त से हो गये थे
किसी को उसका ध्यान न था
अमीरी क्या होती है इसका उसे ज्ञान न था
वह सड़को पर भटक रहा था दुखी मन से
कि एक राह चलते व्यक्ति ने पुछा तेरे पास इतना पैसा है
फिर भी तू दुखी क्यों है यार
वह बोला पैसा तो बहुत है बस एक वस्तु की कमी है वो है प्यार ।
|
|
| |
|
|